लोकार्पण के इस विशेष अवसर पर देश के मूर्धन्य विद्वानों ने भारतीय ज्ञान परम्परा के आलोक में नाट्यशास्त्र के विविध आयामों पर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख विशेषाधिकारी राजकुमार सागर भी उपस्थित थे।
राज्यपाल ने की पहल की सराहना
- राज्यपाल बागड़े ने भारतीय ज्ञान परम्परा पर की गई इस पहल की सराहना की।
- उन्होंने संपादक और लेखक डॉ. राजेश कुमार व्यास को बधाई दी।
- उन्होंने कहा कि यह पुस्तक पाठकों को नाट्यशास्त्र को समझने की नई और मौलिक दृष्टि प्रदान करेगी।
ग्रंथ की मुख्य विशेषताएं
- पंचम वेद: नाट्यशास्त्र को पांचवां वेद माना गया है, जिसमें 37 अध्याय हैं।
- कलाओं का समावेश: नाट्य में रस, संगीत, नृत्य आदि के साथ ही सभी कलाओं से जुड़े महत्वपूर्ण आख्यान और सूत्र इसमें शामिल हैं।
- चारों वेदों का सार: इसमें ऋग्वेद से पाठ्य, सामवेद से गीत, यजुर्वेद से अभिनय और अथर्ववेद से रस को ग्रहण कर रचना की गई है।
- विशेष लेख: पुस्तक में हजारी प्रसाद द्विवेदी और नामवर सिंह के दो दुर्लभ लेख भी शामिल किए गए हैं।
- वैश्विक पहचान: गौरतलब है कि नाट्यशास्त्र को अप्रैल 2025 में यूनेस्को के प्रतिष्ठित 'मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर' में शामिल किया गया था।
विद्वानों का योगदान
ग्रंथ के संपादन के लिए डॉ. राजेश कुमार व्यास ने नाट्यशास्त्र के मर्मज्ञ विद्वानों से आग्रह कर मौलिक दृष्टि से लिखवाया है। पुस्तक में अभिनव गुप्त की नाट्यशास्त्र टीका भारतीय कलाओं को समझने की महत्वपूर्ण दृष्टि देती है। पुस्तक में बैंकॉक एवं कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क के अतिथि आचार्य और राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान में कुलपति रहे डा. राधावल्लभ त्रिपाठी, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व अध्यक्ष एवं सुप्रसिद्ध नाटककार, कवि, आलोचक डॉ. अर्जुन देव चारण, नाट्यशास्त्र के विद्वान व नाट्य निर्देशक पीयाल भट्टाचार्य आदि ने नाट्यशास्त्र को अपनी मौलिक दृष्टि से व्याख्यायित किया है।
संपादक डॉ. राजेश कुमार व्यास के बारे में
- डॉ. राजेश कुमार व्यास देश के जाने-माने संस्कृतिकर्मी, कलाविद और नाट्यशास्त्र के देश के मर्मज्ञ विद्वान हैं।
- उनकी साहित्य की विभिन्न विधाओं में अब तक 27 मौलिक पुस्तकें प्रकाशित हैं।
- वर्तमान में वह लोकभवन में राज्यपाल के अतिरिक्त निदेशक (पीआर) पद पर कार्यरत हैं।
- उन्हें भारत सरकार का प्रतिष्ठित 'राहुल सांकृत्यायन अवार्ड', मध्य प्रदेश सरकार का 'अखिल भारतीय रामचन्द्र शुक्ल आलोचना पुरस्कार', 'सूर्यमल मिसण शिखर सम्मान' आदि कई बड़े सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
- धीरज शर्मा, जयपुर

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